जरुरी तो नहीं

ख्वाबों का होना लाज़मी है
ताबीर एक हो जरुरी तो नहीं
गुज़ारिश मेरी मुख़्तसर ही सही
रहमत तेरी हो जरुरी तो नहीं

फ़र्ज़ नहीं ये हिमायत है
जिस लफ्ज़ से तुझको शिकायत है
शिगाफ़ सीने में है छुपी
एहसास हो तुमको जरुरी तो नहीं

एहसास है मुझको गुरुर नहीं तुझको
मगरूर होने की पर मज़बूरी तो नहीं
ज़माना तंगमिज़ाज़ी है सदियों से
रिश्ते भी हो तंग जरूरी तो नहीं

लेखन: Chandan चन्दन چاندن

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