दिवान-ए-चन्दन


चाँद में सूरत देखने की कोशिश तेरी हर शब् की मैंने
तेरी सूरत नहीं लेकिन ऐसी कि चाँद दिखा पाए
आइना तो टूट जाता है चाँद कहाँ बच पाए
सुना था निशानी रह जाती है ग़र टूटे को जोड़ा जाये
चाँद में दाग भी वही निशानी है ये महसूस की मैंने
चाँद में सूरत देखने की कोशिश तेरी हर शब् की मैंने
दिदार-ए-ख्वाहिश है दिल में बस तुझसे रु-ब-रु हो जाये
जिसने चाँद को शर्मिंदा किया जरा सी नुमाइश हो जाये
निराधार तेरे और चाँद की कोई तशबीह न हो जाये
इसलिए दिवान-ए-'चन्दन' सारी तेरे नाम की मैंने
चाँद में सूरत देखने की कोशिश तेरी हर शब् की मैंने
                      Written By:-
                 Chandan Kumar Gupta

इश्क! तेरे लिए


तेरी मोहब्बत के लिए हमने अपनी पहचान बदल ली
परवाह किये बगैर दुनिया का तेरा साथ चुन ली
ग़र होता खुदा मौजूद ज़मी पर तो देखता ये नज़ारा
जात-पात क्या धर्म क्या हमने नमो-निशां बदल ली
तेरी मोहब्बत के लिए...........
है निशा का आगोश इतना यहाँ जाति-धर्म के नाम पर
देख बंदिशें इश्क पर, हमने तो चश्मनम कर ली
तेरी मोहब्बत के लिए...........
तामीर इश्क की रखी गई थी आदिशक्ति के काल से
बस गिलाफ हटाकर नफरत-द्वेष का हमने तो सहर कर ली
तेरी मोहब्बत के लिए..............
                            Written By:-
                  Chandan Kumar Gupta