वो लड़का

सरसराती ठण्ड हवाओं में अपने सपने लेकर दौड़ रहा है
सुरों से परे, शब्दों से परे अपना ही धुन वो छेड़ रहा है
कामयाबी की आश बहुत है शिकस्त की कोई शिकन नहीं
वो लड़का जो है साधारण सा औरों सा ही तो लगता है

रखा था जब वो पहला पग सबने बहुत सराहा था
गिरा था कई कई बार वो पर कोई नहीं हारा था
आज इक पाँव फिसला तो सबकी चीखें निकल गई
उसने सोचा छोड़ो यारों, उम्मीदें इनकी बिखर गई

पहले चलता था जब वो गिरने का डर सताता था
एक भी लौ ओझल दिखे उसको कभी न भाता था
काँटों पर चलता है अब वो उफ़ भी कभी न करता है
वो लड़का जो है साधारण सा थोड़ा सा अलग लगता है

मंजिल से है दूर भले पर उसको कोई गम नहीं
राहों को ऐसे जी रहा है मानो कोई भरम नहीं
ये कौन है जो दे रहा चुनौती दुखों को कर्ता-धर्ता को
यही वो विरले लड़का है जिसका पहचान बदलता है
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Chandan चन्दन چاندن

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