हसरत-ए-दिल


ये गुल ये गुलशन नज़र ये नज़ारें
हसरत इस दिल की चमन ये बहारें
उम्मीद की शहर में मंजिल की पुकारें
जिन्दगी की भवंर में फंसे अरमान हमारे
समृद्धि के क्षण तूफान भी बन जाते हैं बहारें
जैसे आबरू की तलाश में रिश्तों की कतारें
भले अनजान, बोसा को तैयार, जब चमकते हों सितारे
ग़र ख़राब हो मौसम, चीख को भी दबा देती है ललकारें
कहते हैं बड़े-बुज़ुर्ग, तकदीर भी कुछ होती है प्यारे
और तस्वीर तकदीर की कोई कैसे सवाँरे
सवारने बैठे तो बड़ी तेजी से बदल जाते हैं तारें
समय किसी का कहीं करे इन्तजार कहाँ रे
ये गुल ये गुलशन नज़र ये नज़ारें
हसरत इस दिल की चमन ये बहारें
                                                                Written By:-
                                                                  Chandan Kumar Gupta

क्यों

मन की भावना कहीं विलीन क्यों होती है
किसी की याद में दिल ग़मगीन क्यों होती है
हर सपने तो किसी के पुरे नहीं होते,
तो फिर ये मन सपनों में शरीक क्यों होती है
मन की भावना कहीं विलीन क्यों होती है
किसी की याद में दिल ग़मगीन क्यों होती है.
देखा है चाँद को मैंने नज़रे फेरते हुए,
देखे कई वादों से वादाफ़रोख्त को मुकरते हुए,
फिर भी चाँद से दीदार-ए-जुर्रत क्यों होती है
इन्सां को कसम-ओ-वादों पे यकीं क्यों होती है
मन की भावना कहीं विलीन क्यों होती है
किसी की याद में दिल ग़मगीन क्यों होती है

                          Written By-
                                  CHANDAN KUMAR GUPTA