वो लड़का

सरसराती ठण्ड हवाओं में अपने सपने लेकर दौड़ रहा है
सुरों से परे, शब्दों से परे अपना ही धुन वो छेड़ रहा है
कामयाबी की आश बहुत है शिकस्त की कोई शिकन नहीं
वो लड़का जो है साधारण सा औरों सा ही तो लगता है

रखा था जब वो पहला पग सबने बहुत सराहा था
गिरा था कई कई बार वो पर कोई नहीं हारा था
आज इक पाँव फिसला तो सबकी चीखें निकल गई
उसने सोचा छोड़ो यारों, उम्मीदें इनकी बिखर गई

पहले चलता था जब वो गिरने का डर सताता था
एक भी लौ ओझल दिखे उसको कभी न भाता था
काँटों पर चलता है अब वो उफ़ भी कभी न करता है
वो लड़का जो है साधारण सा थोड़ा सा अलग लगता है

मंजिल से है दूर भले पर उसको कोई गम नहीं
राहों को ऐसे जी रहा है मानो कोई भरम नहीं
ये कौन है जो दे रहा चुनौती दुखों को कर्ता-धर्ता को
यही वो विरले लड़का है जिसका पहचान बदलता है
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Chandan चन्दन چاندن

मित्रता का भाव हो तुम

सहमति असहमति है सहर्ष तुमने स्वीकार किया
हित अहित मान सम्मान तुमने है सरोकार किया
अगणित अशायुक्त जीवन में निस्वार्थ छाँव हो तुम
मित्रता का भाव हो तुम...

वेदनाएं इस संसार में प्रफुल्लित होती हर क्षण है
संग अजेय वाद विवाद से प्रशस्त मन के कण है
जिज्ञासु प्रश्नों से भरे उलझन का ठहराव हो तुम
मित्रता का भाव हो तुम...

जन्म अलग, दाता अलग, कुल की मर्यादा है अलग
पृथक शिक्षाओं से पले मनन की प्रक्रिया है अलग
गुण अवगुन अंतर से परे मानवीय लगाव हो तुम
मित्रता का भाव हो तुम...
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चन्दन Chandan چاندن

फसादी हूँ मैं

जब इच्छाएं ख़त्म हो जाती है
दुःख दर्द नादानी लगती है
उस मुकाम का आदी हूँ मैं
खुद पर विजय का वादी हूँ मैं

धर्म जब नौटंकी लगे
कर्म एकमात्र संगी लगे
ज़िद्द है अतिवादी हूँ मैं
अनसुलझा मियादी हूँ मैं

गलत से समझौता नहीं
अपनों सा सरौता नहीं
यूँ डरता हूँ लड़ाई से
हर क्षण प्रतिवादी हूँ मैं

ज़मीर गर इज़ाज़त न दे
विरोध में इकलौता हूँ मैं
फसाद हो गर वसूलों से
हाँ हाँ फसादी हूँ मैं

♥ चन्दन Chandan چاندن ♥


जरुरी तो नहीं

ख्वाबों का होना लाज़मी है
ताबीर एक हो जरुरी तो नहीं
गुज़ारिश मेरी मुख़्तसर ही सही
रहमत तेरी हो जरुरी तो नहीं

फ़र्ज़ नहीं ये हिमायत है
जिस लफ्ज़ से तुझको शिकायत है
शिगाफ़ सीने में है छुपी
एहसास हो तुमको जरुरी तो नहीं

एहसास है मुझको गुरुर नहीं तुझको
मगरूर होने की पर मज़बूरी तो नहीं
ज़माना तंगमिज़ाज़ी है सदियों से
रिश्ते भी हो तंग जरूरी तो नहीं

लेखन: Chandan चन्दन چاندن

तेरा शहर

तेरे शहर की कुछ बात अलग है
लोग हैं वही जज़्बात अलग है
हक़ीक़त है लोगों पे राय मेरी,
या मेरे नज़रों पे चस्मात अलग है?
कुछ अलग तो नहीं मेरा शहर तेरे शहर से
मय नज़्र की खिंचती है यहाँ भी सड़क से
फिर तेरे शहर से क्यों मेरे तालुकात अलग है?
तेरा शहर में होने का शायद अर्थात अलग है
धूल मिट्टी के कण चलायमान है दोनों शहर में
गंदगी और पीड़ा विराजमान है दोनों शहर में
तुम्हारे सिवा तेरे शहर की औकात विरल है
तुम दर्द में भी मिलो तो दर्द का उन्माद अलग है
गर रुखसत हो सको अपने शहर से मेरे शहर में
बचेगा न कुछ अवशेष के सिवा तेरे शहर में
तेरा साथ और जज्बात के बिना क्या अलग है ?
कोई और भी हो खास किसी का तो बात अलग है
सप्रेम लेखन: चन्दन Chandan چاندن