मन की पुकार

मौसम की रंगत मांगे तेरी संगत
आओ मेरे मीत निभाओ प्रीत
तुमबिन बेसुरी है जीवन संगीत
सरसों के फुल पिरोता है शूल
इमारतें ख्वाबों की तुमबिन है धुल
याद तुम्हारी जगाये रात सारी
अभिलाषा मन की फिर भी न हारी
मेरे संग जाओ रंग
इश्क की जंग करो ना दंग
तुम बिन जीवन है बेरंग
सावन का मौसम और ये यौवन
बीत न जाये संग ये सौतन
मन से उठे पुकार
छोड़ दो ये संसार
विदा करे दो हिर्दय को जो
क्यों रखें उनसे सरोकार
Written by:-
Chandan