In the morning at 5

In the morning at five
when the world takes sigh
walking in street light
gives feel of future bright

when sweeper sweeps
horn gives a slow beeps
I wonder on the road
in my city in the hope

path says me go ahead
keeping goal in your head
something be always missing
leave the rest goal is kissing

when you find no one around
own efforts will make sound
leave no space for regret
forget luck else luck forget

-Chandan Kumar Gupta


उसके जाने से

जिन्दगी थमी नहीं है उसके जाने से
कुछ बदला नहीं उसके बदल जाने से
लोग वही हैं जमाना और दस्तूर वही है
कोई खुश कोई नाराज आज भी है ज़माने से
जिन्दगी थमी नहीं है उसके जाने से

तनाव वही है, आकर्षण का खिंचाव वही है
जलन होती है आज भी गैरों के पाने से
तुम न मानोगे कभी ए मेरे हमदम
पर रिश्ते बदलते नहीं औरों के आने से
जिन्दगी थमी नहीं है उसके जाने से

सितम भी कायम है रहम भी कायम है
आलोचकों के अंदाज भी बदले नहीं ज़माने से
कभी आओ मेरे कुचे में तो दिखाऊं तुम्हे
सांस छुटी न अबतक सच को दबाने से
जिन्दगी थमी नहीं है उसके जाने से

दर्द आज भी है मरहम आज भी है
घाव भरा नहीं कभी मन बहलाने से
एहसास भी है मौसम का अंदाज़ भी है
चाँद भी थका नहीं उपमा बदल जाने से
जिन्दगी थमी नहीं है उसके जाने से

-Chandan

तुमसे मिलने की बेताबी क्यों है

तेरा अपना होने पे भी शक है
फिर भी तुमसे मिलने की बेताबी क्यों है
जानता हूँ तेरे परायेपन की वजह
फिर भी ये आँखें हुआ शराबी क्यों है
तुमसे मिलने की बेताबी क्यों है

तुम्हारे पास रहूँ हरदम बिन-वजह
दिल ने सोचा ये गुस्ताखी क्यों है
इक दर्द से महरूम हुए नहीं पूरी तरह
दूजे आह से लिपटने की ख्वाहिस क्यों है
तुमसे मिलने की बेताबी क्यों है

ऐसा नहीं की तेरी वफ़ा पे यकीं न हो
फिर भी इस दिल में शक की गुंजाइश क्यों है
फासला ना यूँ कभी तुमसे बढे
अनगिनत शर्तों की आजमाइश क्यों है
तुमसे मिलने की बेताबी क्यों है

-Chandan

रिश्तों की समझ ऐसी भी क्या

रिश्तों की समझ ऐसी भी क्या
एक तोड़ दिया एक जोड़ लिया
अपनों से मुख यूँ मोड़ के क्यों
और भी अपना जोड़ लिया

जिस अपनों को अपनाते हो
क्या वो अपना तेरा अपना है
जिस अपनों को छोड़ तुम जाते हो
या वो अपना ही तेरा अपना है

तशबीह न रिश्तों का किया करो
सृजन ईश ने है खुद ही किया
रिश्तों की समझ ऐसी भी क्या
एक तोड़ दिया एक जोड़ लिया

उम्र की कीमत लगाकर तुमने
इक रिश्ते का आगाज़ किया
स्वार्थ-निहित संसार का फिर
क्यों तूने नक़ल-नमाज़ किया

विश्वास न किसी का त्याग करो
हर आह को इसने मन से पिया
रिश्तों की समझ ऐसी भी क्या
एक तोड़ दिया एक जोड़ लिया

-Chandan

यकीं नहीं होता

बेवफा हो तुम, यकीं नहीं होता
जफा की पहचान हो, यकीं नहीं होता
मैं पहचान न सका तुम्हे, यकीं नहीं होता
कसमें वादे झूठे थे, यकीं नहीं होता

स्नेह की पहचान हो नाम में झलकता है
कोयल की कुक हो बातों में बरसता है
मेरी ही मुस्कान हो चेहरे से टपकता है
सब पहचान झूठी है, यकीं नहीं होता

"संग मोहे तेरा भाता है, जीवन की पहचान हो
इश्क है समझ में आता है न ही तुम अनजान हो
जीवन भर साथ निभाएंगे, वादों पे कुर्बान हो"
अचानक सबकुछ भूल गए, यकीं नहीं होता

बेवफा हो तुम, यकीं नहीं होता
कसमें वादे झूठे थे, यकीं नहीं होता
सब पहचान झूठी है, यकीं नहीं होता
अचानक सबकुछ भूल गए, यकीं नहीं होता

written by:-
Chandan