तुमसे मिलने की बेताबी क्यों है

तेरा अपना होने पे भी शक है
फिर भी तुमसे मिलने की बेताबी क्यों है
जानता हूँ तेरे परायेपन की वजह
फिर भी ये आँखें हुआ शराबी क्यों है
तुमसे मिलने की बेताबी क्यों है

तुम्हारे पास रहूँ हरदम बिन-वजह
दिल ने सोचा ये गुस्ताखी क्यों है
इक दर्द से महरूम हुए नहीं पूरी तरह
दूजे आह से लिपटने की ख्वाहिस क्यों है
तुमसे मिलने की बेताबी क्यों है

ऐसा नहीं की तेरी वफ़ा पे यकीं न हो
फिर भी इस दिल में शक की गुंजाइश क्यों है
फासला ना यूँ कभी तुमसे बढे
अनगिनत शर्तों की आजमाइश क्यों है
तुमसे मिलने की बेताबी क्यों है

-Chandan

रिश्तों की समझ ऐसी भी क्या

रिश्तों की समझ ऐसी भी क्या
एक तोड़ दिया एक जोड़ लिया
अपनों से मुख यूँ मोड़ के क्यों
और भी अपना जोड़ लिया

जिस अपनों को अपनाते हो
क्या वो अपना तेरा अपना है
जिस अपनों को छोड़ तुम जाते हो
या वो अपना ही तेरा अपना है

तशबीह न रिश्तों का किया करो
सृजन ईश ने है खुद ही किया
रिश्तों की समझ ऐसी भी क्या
एक तोड़ दिया एक जोड़ लिया

उम्र की कीमत लगाकर तुमने
इक रिश्ते का आगाज़ किया
स्वार्थ-निहित संसार का फिर
क्यों तूने नक़ल-नमाज़ किया

विश्वास न किसी का त्याग करो
हर आह को इसने मन से पिया
रिश्तों की समझ ऐसी भी क्या
एक तोड़ दिया एक जोड़ लिया

-Chandan

यकीं नहीं होता

बेवफा हो तुम, यकीं नहीं होता
जफा की पहचान हो, यकीं नहीं होता
मैं पहचान न सका तुम्हे, यकीं नहीं होता
कसमें वादे झूठे थे, यकीं नहीं होता

स्नेह की पहचान हो नाम में झलकता है
कोयल की कुक हो बातों में बरसता है
मेरी ही मुस्कान हो चेहरे से टपकता है
सब पहचान झूठी है, यकीं नहीं होता

"संग मोहे तेरा भाता है, जीवन की पहचान हो
इश्क है समझ में आता है न ही तुम अनजान हो
जीवन भर साथ निभाएंगे, वादों पे कुर्बान हो"
अचानक सबकुछ भूल गए, यकीं नहीं होता

बेवफा हो तुम, यकीं नहीं होता
कसमें वादे झूठे थे, यकीं नहीं होता
सब पहचान झूठी है, यकीं नहीं होता
अचानक सबकुछ भूल गए, यकीं नहीं होता

written by:-
Chandan

यादों से कहो मुझसे दूर रहा करे

अपनी यादों को कहो मुझसे दूर रहा करे
बर्बादी की सारी हदों से गुजर चूका हूँ मैं
कहते हैं कि याद अपनों की ही आती है
परिभाषा अपनों की बदल चूका हूँ मैं
अपनी यादों से कहो मुझसे दूर रहा करे
बर्बादी की सारी हदों से गुजर चूका हों मैं

जब भी याद तुम्हारी आती है
अपना सुध खो देता हूँ मैं
पल हो कितना भी ख़ुशी का
क्षण भर को रो देता हूँ मैं
लम्हे जो साथ बिताये थे
यादों का काँटा लाता है
पल भर की जो कभी ख़ुशी थी
किश्तों में तड़पाता है

गर तू नहीं मेरे जीवन में
यादों को क्यों संजोयुं मैं
भूल कर अपनी ख्वाहिसों को
काँटों में खुद को पिरोयूं मैं
हिम्मत आगे बढ़ने की
ओ मेरे इश मुझे दे दे
रिश्ता बस एक तुझसे हो
झूठे रिश्तों से मुक्ति दे दे


-Chandan Kumar Gupta


रिश्तों में अवसर का स्थान नहीं होता

ना जाने कैसे लोग रंग बदलते रहते हैं
मैं तो महज कोशिश करके भी शर्मा जाता हूँ
किसी का दिल दुखाकर भी वो हँसते हैं बेहिसाब
मैं दिल्लगी से पहलेे भी कहता हूँ माफ़ी जनाब
यूँ पहचान बदलने की आदत इंसान की
उफ़ देते हैं हवाला अधूरे अरमान की
पर इंसान हकीकत से अनजान नहीं होता
रिश्तों में अवसर का स्थान नहीं होता
जिस रंग में रंगते हैं लोग अवसर मानकर
फीका न होने की उस रंग का प्रमाण नहीं होता
जिस रंग को छोड़ देते हैं फीका जानकर
उस रंग के भविष्य का ज्ञान नहीं होता
अवसर मान अपनाते हैं जिसे
अवसर उसे भी मिल सकता है
फीका जान ठुकराते हैं जिसे
किस्मत उसका भी बदल सकता है
पर साथ निभाये अवसर मेज्मान नहीं होता
गस्त खाने का फिर से किसी का अरमान नहीं होता
Written By:
Chandan