रिश्तों में अवसर का स्थान नहीं होता

ना जाने कैसे लोग रंग बदलते रहते हैं
मैं तो महज कोशिश करके भी शर्मा जाता हूँ
किसी का दिल दुखाकर भी वो हँसते हैं बेहिसाब
मैं दिल्लगी से पहलेे भी कहता हूँ माफ़ी जनाब
यूँ पहचान बदलने की आदत इंसान की
उफ़ देते हैं हवाला अधूरे अरमान की
पर इंसान हकीकत से अनजान नहीं होता
रिश्तों में अवसर का स्थान नहीं होता
जिस रंग में रंगते हैं लोग अवसर मानकर
फीका न होने की उस रंग का प्रमाण नहीं होता
जिस रंग को छोड़ देते हैं फीका जानकर
उस रंग के भविष्य का ज्ञान नहीं होता
अवसर मान अपनाते हैं जिसे
अवसर उसे भी मिल सकता है
फीका जान ठुकराते हैं जिसे
किस्मत उसका भी बदल सकता है
पर साथ निभाये अवसर मेज्मान नहीं होता
गस्त खाने का फिर से किसी का अरमान नहीं होता
Written By:
Chandan


अजनबी सी लगती है

सेहर की धुप की किरने तेरे चेहरे पर जो पड़ती है
सच मानो मेरी जान दिल में हलचल सी होती है
तेरी मासूमियत का आशिक वो आसमा भले हो
पर तुझे छुए वो किरने दिल में तपिश भी होती  है
नूर तेरे चेहरे का खुदा ने रचा भले हो
पर उसका हक जाताना तुमपे ज्यादती सी लगती हैै
सफ़र-ए-जिन्दगी में तुम मिली मुझे इस मोड़ पर
देखा हुआ चेहरा भी कुछ अजनबी सी लगती है
काश कि खुदा कभी सुन सके मिन्नतें मेरी
बदले कीमत के सही कर दे पूरी हसरतें मेरी
फासले दो गज का भी अब मीलों सी लगती है
देखा हुआ चेहरा भी कुछ अजनबी सी लगती है
जब सुना खुद मिन्नतें मेरी देर हो चुकी थी तब
मंजिलें मेरी तुम्हारी द्वि ओर हो चुकी थी तब
अब मेरा हक जताना तुम पे खुदगर्जी सी लगती है
देखा हुआ चेहरा भी कुछ अजनबी सी लगती है
Written By:
Chandan

कहीं ये तू तो नहीं

सुर्ख हवाओं का देख के लगता है
कहीं ये तू तो नहीं
अनजान चेहरों पे नज़र टिकता है
कहीं ये तू तो नहीं
मैं साहिल पे बैठा रहा रात भर
इक लौ के सहारे आँख भर
लौटा तो मुड़ के देखा फिर से
कहीं ये तू तो नहीं
मैं अलाप कोई लगाऊं
सुर-ताल कोई छेड़ू
गीतों में जिक्र अजनबी की
कहीं ये तू तो नहीं
मैं मुस्किल में उलझ जाऊं
सौ बार फिसल जाऊं
हौसला संभल जाने का
कहीं ये तू तो नहीं
क़द्र दीवान का करना
रसमय मन को भिगोना
खोया ख्वाबों में जिसके "चन्दन"
कहीं ये तू तो नहीं
written by-
Chandan

मन की पुकार

मौसम की रंगत मांगे तेरी संगत
आओ मेरे मीत निभाओ प्रीत
तुमबिन बेसुरी है जीवन संगीत
सरसों के फुल पिरोता है शूल
इमारतें ख्वाबों की तुमबिन है धुल
याद तुम्हारी जगाये रात सारी
अभिलाषा मन की फिर भी न हारी
मेरे संग जाओ रंग
इश्क की जंग करो ना दंग
तुम बिन जीवन है बेरंग
सावन का मौसम और ये यौवन
बीत न जाये संग ये सौतन
मन से उठे पुकार
छोड़ दो ये संसार
विदा करे दो हिर्दय को जो
क्यों रखें उनसे सरोकार
Written by:-
Chandan

अहसास नहीं होता

कर सकता था इंतजार बारिश के रुकने का
पर तेरे छुअन का अहसास नहीं होता
तुम जो यादों में छोड़ जाते हो तन्हाई
उस उल्फत के होने का अहसास नहीं होता
लोग पत्थर के डर से रुक गए थे वहां
चलने की जिद में कोई रुसवा नहीं होता
मैं भी रुक कर इंतजार करता तेरा
पर अब बर्दास्त अफवाह नहीं होता
तेरे साथ बारिश में भीगने की ख्वाहिस
पर तू मिले बिन मौसम तो बरसात नहीं होता
कर सकता था इंतजार बारिश के रुकने का
पर तेरे छुअन का अहसास नहीं होता
तुम जो यादों में छोड़ जाते हो तन्हाई
उस उल्फत के होने का अहसास नहीं होता
Written By- Chandan