चाँद और सूरज

चमकता है चाँद सूरज की लाली में दुनिया जानती है
है दीवानी सूरज की चाँद भी ये मानती है
पर चाँद ने कभी सूरज से इकरार न किया
झूठ कहते हैं लोग सूरज ने कभी प्यार न किया
ग्रह नक्षत्र तारे सब मूकदर्शक बने रहे
परम्परा की आड़ के स्वभाव में डटे रहे
दर्द पे मरहम लगाना किसी ने स्वीकार न किया
झूठ कहते हैं लोग सूरज ने कभी प्यार न किया
दिखाई होती किसी ने इंसानियत, नज़ारे बदल जाते
दिन को भी मिलती ठंढक, हर रात उजाले हो जाते
ओछी रीत बदलने की बीड़ा किसी ने सरोकार न किया
झूठ कहते हैं लोग सूरज ने कभी प्यार न किया
रोज इक चाँद-सूरज को फरमान-ए-हिज्र दी जाती है
दुनिया बड़ी ज़ालिम है इश्क की सजा सुनाती है
इश्क वालों ने भी पर इश्क को लगाम ना दिया
झूठ कहते हैं लोग सूरज ने कभी प्यार ना किया
Written by:-
Chandan

आओ ना

क्यों हो इतने दूर पास मेरे तुम आओ ना
जान है जब एक जिस्म भी कर जाओ ना
दूरियां मिटा दो सारे अब और तडपाओ ना
क्यों हो इतने दूर पास मेरे तुम आओ ना
खामोश हो क्यों कुछ तो बोल जाओ ना
मन में कुछ दुविधाएँ है आके तुम सुलझाओ ना
डर लगता है तन्हाई से यूँ फासले बढाओ ना
क्यों हो इतने दूर पास मेरे तुम आओ ना
राहें जो सुनी पड़ी है आके तुम सजाओ ना
महक जो फीकी पड़ी है आके तुम महकाओ ना
रात काली बहुत घनी है यूँ जुल्फें बिखराओ ना
क्यों हो इतने दूर पास मेरे तुम आओ ना
ख्वाब जो मिलन की है कभी तो सच कर जाओ ना
प्यार हमेशा बनी रहे वादे जो किये निभाओ ना
जाना हमे बहुत दूर है यूँ कदम डगमगाओ ना
क्यों हो इतने दूर पास मेरे तुम आओ ना
जान है जब एक जिस्म भी कर जाओ ना
क्यों हो इतने दूर पास मेरे तुम आओ ना
Written By:-
Chandan

ख़ुशी और गम

मर के भी देखा डर के भी देखा
उंच-नीच हर राह से गुजर के भी देखा
शराफ़त का घिरोंदा बताते लोग जिसे
रात सारी उसमे ठहर के भी देखा
ना चैन मिला मंदिर में ना सुकूं मिला मशजिद में
साधू-फ़क़ीर की झोलियों को भर के भी देखा
इसी खोज में जब निकल गया दूर मै
अपने अन्दर जरा टटोल के भी देखा
ख़ुशी और उल्लास सब मेरा ही नजरिया था
दुःख और दर्द सब मेरा ही जरिया था
फिर दर्द में मुस्कुराने की कला सीखी है मैंने
सुकूं मिला जब दूसरों की खुशियों में थिरक के देखा
Written By:-
Chandan Kumar Gupta

नाम भी न पूछ सका

वो नज़रों में समां के चली गई
मैं नाम भी न पूछ सका
जीता था किसी के दिल को मैंने
इनाम भी न पूछ सका
बातें थी थोड़ी उससे दिल की
सरेआम मैं न पूछ सका
वो नज़रों में समां के चली गई
मैं नाम भी न पूछ सका
बारिश की बुँदे हो या पुरवाई की हो छुअन
मदहोश बना के चली गई मैं इलज़ाम भी न पूछ सका
सागर सी इश्क की लहरों में मैं गोता मारता डूब गया
उस गहराई के आलम का अंजाम मैं न पूछ सका
मौके भी मिले कोशिश भी किया
उसे पाने की हर साजिश भी किया
पर जुदा इश्क के चेहरे का गुलफाम मैं न पूछ सका
वो नज़रों में समां के चली गई
मैं नाम भी न पूछ सका.....

Written By:-
Chandan Kumar Gupta

मैं और तेरे वादे

तेरे वादों से होती है मुझे नफरत कुछ इस तरह
बदले की आग में जलता हो दुश्मन जिस तरह
तेरे इक मीठी बातों से हो जाती है हर सिकवा दूर
बेक़रार इश्क में हर गुनाह भूल जाता है आशिक जिस तरह
तुम कहो तो दिन तुम कहो तो रात कहो तो सुबहो-शाम
और मनाना हर बात को ऐसे होता है इतिहास में जिस तरह
तेरे हर सितम मंज़ूर ग़र तू हो के रहे हमारी
वरना मतलबी हूँ मैं भी बिलकुल तुम्हारी तरह
पहली दफ़ा मिलने की सुध में बंधन सारे तोड़ दिए
दूसरी दफ़ा दो दिल मिलने की रीत सारे तोड़ दिए
तीसरी दफा जब चले गए तुम अनजान राही की तरह
जीवन वीरानी हो गई है सुनसान झाडी की तरह
गर मैं न बदला तू न बदली एहसास कैसे बदल गए
आँखे हैं वही रातें हैं वही ख्वाब कैसे बदल गए
रीत सारे गर तोड़ सकूँ मैं वादा-ए-सियासत की तरह
वापस लौटकर तू आ जाये मौसम औ सावन की तरह
    Written By:-
Chandan Kumar Gupta
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