कितना आसाँ है

दिल में हो लाखों बातें जुबां पे ख़ामोशी लाना कितना आसां है
दिल में छुपाये दर्द महफ़िल में मुस्कुराना कितना आसां है
जिस दर्द से हम लोगों को महरूम किया करते हैं
खुद उस दंगल में फंसकर निकलना कितना आसां है
इश्क की गलियारों में हर इक पहलु पे नज़र रखते हैं हम
एक भी पहलु को खुद नज़र न आना कितना आसां है
देते हैं नसीहत लोग 'इश्क में है दर्द न लगाना गले से इसे'
इश्क के कुचे में पड़ी इक नज्र से नज़रे चुराना कितना आसाँ है
गिरकर संभलने की सहानुभूति हर बात में देते हैं लोग
उम्मीदे-ए-राह में कभी गिरकर देखो संभालना कितना आसाँ है
कहने को बड़ी-बड़ी बातें चंद लम्हों में कह देते हैं लोग
कभी हकीकत में कदम रख के देखो करना कितना आसाँ है
हर इक गुनाह की माफ़ी तो बेझिझक मांग लेते हैं लोग
कभी गुनाह का शिकार बनके देखो माफ़ करना कितना आसाँ है
दिल में हो लाखों बातें जुबां पे ख़ामोशी लाना कितना आसां है
दिल में छुपाये दर्द महफ़िल में मुस्कुराना कितना आसां है
                                       Written By:-
                               Chandan Kumar Gupta











अल्फाज़ कहाँ से लाऊं


अल्फाज़ कहाँ से लाऊं तेरी यादें बयां करने को
जलता जा रहा हूँ दिन-ब-दिन तुझसे मिलने को
काश कभी किस्मत भी हमारी थक जाये तरसने को
साथ हो जाएँ दो दिल कभी साथ हंसने को
वादियाँ भी बाहें फैलाये है हमें कसने को
तू भी आ जा साथ मेरे निर्वाह करने को
यूँ तो गुल बहुत है गुलशन में महकने को
पर इन्तजार में बैठा हूँ गुलाब के खिलने को
गमनाक ख़लिश तेरे हिज्र का महरूम करने को
आज भी इन्तजार में हूँ ये गम दूर करने को
अल्फाज़ कहाँ से लाऊं तेरी यादें बयां करने को
जलता जा रहा हूँ दिन-ब-दिन तुझसे मिलने को
                        Written By:-
                   Chandan Kumar Gupta

मुझे मेरी जिन्दगी दे दो



मै इक आवारा जिन्दगी ढूंढता मुझे मेरी जिन्दगी दे दो
न चाहिए जायदाद, न सोहरत, न कोई उपनाम
न हो कोई बंधन, बस इक पल आज़ादी की मोहलत दे दो
मुझे सच पढ़ाते हुए खुद सच से क्यों मुकर गए
सच मत सिखाओ मुझे या फिर सच्ची दुनिया दे दो
मै इक आवारा जिन्दगी ढूंढता मुझे मेरी जिन्दगी दे दो
दे ना सको ग़र हौसला हार में जीत में उत्सव किस काम की
आसमां में उड़ न सके तो क्या जमीं से जुड़ने का मौका दे दो
महल ना जिसका बन सके क्या घर में रहने योग्य नहीं
नहीं रहना पत्थरों के घर में मुझे मेरा आशियाना दे दो
मै इक आवारा जिन्दगी ढूंढता मुझे मेरी जिन्दगी दे दो
                       Written By:-
                Chandan Kumar Gupta




A Question to Aamir


चिंगारी इक पल का जलाकर चुप क्यों कोई हो जाता है
लौ किसी दीपक की जलने तक ठहर वो क्यों नहीं पाता है
क्या झूठ इतना ताक़तवर है की वो अंत तक डटा रह जाता है
या सच इतना कड़वा है की वो स्थिर नहीं रह पाता है
उठती है जब कोई आग मन में शोलों सा भड़क जाता है
शबनम सा कोई आवे तो मन सुलगा उसे क्यों नहीं पाता है
इक शख्स किसी दीपक को बार-बार सुलगाता है
कुछ वक़्त की आंधी बुझाता है कुछ जलता रह जाता है
                                 आपने भी इक लौ को बड़ी सिद्दत से छेड़ा है
                                 सेहर हुई गर्मजोशी से अब धुंधला नजर आता है
                                 इस सच के प्रज्वलित होने तक क्या आप टिक पाएंगे
                                  इक आन्दोलन की नीव रख इतिहास में नाम रचाएंगे
                                  या मन की भड़ास निकालकर संतुष्टि पा जायेंगे
                                  मोर्चा संभाल कर रण का आप भी पीठ दिखायेंगे
             Written By:-
       Chandan Kumar Gupta

समय था वो भी समय है ये भी



इक शब्द आहट का सुनकर चहकना समय था वो भी
आज परिचय के बाद भी पूछना 'आप कौन?' समय है ये भी
कभी सपनो की दुनिया सजाते न थकना समय था वो भी
आज हकीकत सह-सहकर थकना समय है ये भी
सोते-जागते यूँ बातों का ताना-बाना बुनना समय था वो भी
आज साधन-संपन्न होकर भी बातों को तरस जाना समय है ये भी
रूठना-मानना, गाना-गुनगुनाना समय था वो भी
न है कोई मौन-व्रत फिर भी बोल ना पाना समय है ये भी
कवो भीभी बारिश में भी नक़ाब हटाना समय था
आज गर्मियों में भी परदे का गिराना समय है ये भी
बिन सवाल किये विश्वाश करना समय था वो भी
आज हर जवाब में साजिश का शक होना समय है ये भी
इक शब्द आहट का सुनकर चहकना समय था वो भी
आज परिचय के बाद भी पूछना 'आप कौन?' समय है ये भी
                                     Written By:-

                            Chandan Kumar Gupta