तेरे प्यार में

निःशब्द हो गए लफ्ज़ सारे तेरे इंतजार में
एहसास सारा खो चूका हूँ मैं तो तेरे प्यार में
भावनाओ को व्यक्त करना चाहता हूँ बेशक मगर
अश्क रेगिस्तान हो चुकी है तेरे इंतजार में
क्यों हूँ लालायित पाने को तुझको पूछता हूँ खुद से मैं
जल-बुझ जाऊं ऐसी भी क्या नूर होगी तेरे दीदार में
जवाब भी क्या सुन सकूँगा हामी की इंकार में
अधजगा हूँ अधसोया हूँ प्रिये तेरे प्यार में
आस कभी घटती नहीं बादल हिज्र के छटती नहीं
आलम कुछ ऐसा ही है जैसे चन्दन संसार में
दिल से कहा यूँ ना बैठ लेकर पहलु में उसे
ये दिल भी दगाबाज़ निकला आज तेरे प्यार में
निःशब्द हो गए लफ्ज़ सारे तेरे इंतजार में
अहसास सारा खो चूका हूँ मैं तो तेरे प्यार में...
Written By:-
Chandan

चाँद और सूरज

चमकता है चाँद सूरज की लाली में दुनिया जानती है
है दीवानी सूरज की चाँद भी ये मानती है
पर चाँद ने कभी सूरज से इकरार न किया
झूठ कहते हैं लोग सूरज ने कभी प्यार न किया
ग्रह नक्षत्र तारे सब मूकदर्शक बने रहे
परम्परा की आड़ के स्वभाव में डटे रहे
दर्द पे मरहम लगाना किसी ने स्वीकार न किया
झूठ कहते हैं लोग सूरज ने कभी प्यार न किया
दिखाई होती किसी ने इंसानियत, नज़ारे बदल जाते
दिन को भी मिलती ठंढक, हर रात उजाले हो जाते
ओछी रीत बदलने की बीड़ा किसी ने सरोकार न किया
झूठ कहते हैं लोग सूरज ने कभी प्यार न किया
रोज इक चाँद-सूरज को फरमान-ए-हिज्र दी जाती है
दुनिया बड़ी ज़ालिम है इश्क की सजा सुनाती है
इश्क वालों ने भी पर इश्क को लगाम ना दिया
झूठ कहते हैं लोग सूरज ने कभी प्यार ना किया
Written by:-
Chandan

आओ ना

क्यों हो इतने दूर पास मेरे तुम आओ ना
जान है जब एक जिस्म भी कर जाओ ना
दूरियां मिटा दो सारे अब और तडपाओ ना
क्यों हो इतने दूर पास मेरे तुम आओ ना
खामोश हो क्यों कुछ तो बोल जाओ ना
मन में कुछ दुविधाएँ है आके तुम सुलझाओ ना
डर लगता है तन्हाई से यूँ फासले बढाओ ना
क्यों हो इतने दूर पास मेरे तुम आओ ना
राहें जो सुनी पड़ी है आके तुम सजाओ ना
महक जो फीकी पड़ी है आके तुम महकाओ ना
रात काली बहुत घनी है यूँ जुल्फें बिखराओ ना
क्यों हो इतने दूर पास मेरे तुम आओ ना
ख्वाब जो मिलन की है कभी तो सच कर जाओ ना
प्यार हमेशा बनी रहे वादे जो किये निभाओ ना
जाना हमे बहुत दूर है यूँ कदम डगमगाओ ना
क्यों हो इतने दूर पास मेरे तुम आओ ना
जान है जब एक जिस्म भी कर जाओ ना
क्यों हो इतने दूर पास मेरे तुम आओ ना
Written By:-
Chandan

ख़ुशी और गम

मर के भी देखा डर के भी देखा
उंच-नीच हर राह से गुजर के भी देखा
शराफ़त का घिरोंदा बताते लोग जिसे
रात सारी उसमे ठहर के भी देखा
ना चैन मिला मंदिर में ना सुकूं मिला मशजिद में
साधू-फ़क़ीर की झोलियों को भर के भी देखा
इसी खोज में जब निकल गया दूर मै
अपने अन्दर जरा टटोल के भी देखा
ख़ुशी और उल्लास सब मेरा ही नजरिया था
दुःख और दर्द सब मेरा ही जरिया था
फिर दर्द में मुस्कुराने की कला सीखी है मैंने
सुकूं मिला जब दूसरों की खुशियों में थिरक के देखा
Written By:-
Chandan Kumar Gupta

नाम भी न पूछ सका

वो नज़रों में समां के चली गई
मैं नाम भी न पूछ सका
जीता था किसी के दिल को मैंने
इनाम भी न पूछ सका
बातें थी थोड़ी उससे दिल की
सरेआम मैं न पूछ सका
वो नज़रों में समां के चली गई
मैं नाम भी न पूछ सका
बारिश की बुँदे हो या पुरवाई की हो छुअन
मदहोश बना के चली गई मैं इलज़ाम भी न पूछ सका
सागर सी इश्क की लहरों में मैं गोता मारता डूब गया
उस गहराई के आलम का अंजाम मैं न पूछ सका
मौके भी मिले कोशिश भी किया
उसे पाने की हर साजिश भी किया
पर जुदा इश्क के चेहरे का गुलफाम मैं न पूछ सका
वो नज़रों में समां के चली गई
मैं नाम भी न पूछ सका.....

Written By:-
Chandan Kumar Gupta