मैं और तेरे वादे

तेरे वादों से होती है मुझे नफरत कुछ इस तरह
बदले की आग में जलता हो दुश्मन जिस तरह
तेरे इक मीठी बातों से हो जाती है हर सिकवा दूर
बेक़रार इश्क में हर गुनाह भूल जाता है आशिक जिस तरह
तुम कहो तो दिन तुम कहो तो रात कहो तो सुबहो-शाम
और मनाना हर बात को ऐसे होता है इतिहास में जिस तरह
तेरे हर सितम मंज़ूर ग़र तू हो के रहे हमारी
वरना मतलबी हूँ मैं भी बिलकुल तुम्हारी तरह
पहली दफ़ा मिलने की सुध में बंधन सारे तोड़ दिए
दूसरी दफ़ा दो दिल मिलने की रीत सारे तोड़ दिए
तीसरी दफा जब चले गए तुम अनजान राही की तरह
जीवन वीरानी हो गई है सुनसान झाडी की तरह
गर मैं न बदला तू न बदली एहसास कैसे बदल गए
आँखे हैं वही रातें हैं वही ख्वाब कैसे बदल गए
रीत सारे गर तोड़ सकूँ मैं वादा-ए-सियासत की तरह
वापस लौटकर तू आ जाये मौसम औ सावन की तरह
    Written By:-
Chandan Kumar Gupta
ू

तेरे बिन

अजीब कशमकश में है जिन्दगी तेरे बिन
जिन्दा हैं या बस जी रहे हैं तेरे बिन
पलते थे कुछ ख्वाब पहले भी इस ज़हन में
पर दिल बेक़रार ना था यूँ तेरे बिन
अब तो हर ख्वाब टूटता नज़र आता है
कैसे गुजरेगी तनहा जिन्दगी तेरे बिन
इक स्वप्न सजाता हूँ बीच तुमको बसाता हूँ
अब वो भी राश नहीं आता है तेरे बिन
बेफिक्र चलता था मैं हर राह में पहले
कदम भी उठ नहीं पाता है अब राहों में तेरे बिन
आगोश तुम्हारी यादों का छाया है इस कदर
रात मसनद को भरता हूँ अब बाँहों में तेरे बिन
मैं तड़पता था तड़पता हूँ ये आदत है मेरी
साथ भाता नहीं है किसीका तेरे बिन
मैं चन्दन हूँ सुगन्धित हूँ जानता हूँ
महक फीकी सी लगती है अब सांसो में तेरे बिन
आ जाओ पास मेरे पुकारता हूँ मैं
वीरानिया सी छाई है अब बागों में तेरे बिन
अजीब कशमकश में है जिन्दगी तेरे बिन
जिन्दा हैं या बस जी रहे हैं तेरे बिन
          Written By:-
     Chandan Kumar Gupta

जब तेरा चेहरा ख्यालों में आता है

अनायास जब तेरा चेहरा ख्यालों में आता है
मुस्कान की झलक यूँ मेरे सायों में आता है
कि ना छलके तेरी आँखों से जफ़ाओं का काजल
मेरी यादें भी ख्यालों को छोड़ जाता है
वो दिन कुछ और थे जब तू मेरी जूनून थी
काँटों भरी राहों में बस तू ही इक सुकून थी
छन भर कि लालसा से नेह जोड़ बैठा था मै
गजदंत कि सच्चाई से मेरी आँखे भी महरूम थी
थी शोर मेरे अन्दर जो कहीं और ढूंढ़ रहा था मै
हुई पहचान खुद से जब चाह ढूंढ़ रहा था मै
पर अब वो चाह भी मेरा साथ छोड़ जाता है
अनायास जब तेरा चेहरा ख्यालों में आता है
Written By:-
Chandan Kumar Gupta




ख्वाहिश तेरे काजल की

तेरे काजल की ख्वाहिश थी, वफ़ा को नज़र न लग सके
उसने काजल मिटा डाला कि हमारी असर न हो सके
सिलसिला ख्वाहिशों का पनपता रहा यूँ बेसबब
उसने नींद से जगा डाला कि यूँ बसर न हो सके
तुझसे गुफ्तगू की चर्चा फैलती रही सरेआम
उसने लफ्जों-जरिया मिटा डाला कि यूँ मशहूर न हो सके
खुद से हारने का किस्सा सुनाऊं भी तो किसे मैं
खुद को मशगुल जताते हैं सब कि हमसे मशरूफ हो सके
जज़्बात छुपाने की कला जो कभी सीखी थी तुझसे
हमने आजमाइश कर डाला कि तू रकीब तो दिख सके
पर अल्फाज़ तेरे "चन्दन" दगा न कर सका
वो गीत बन बिखर गए कि यूँ बयां तो हो सके
तेरे काजल की ख्वाहिश थी, वफ़ा को नज़र न लग सके
उसने काजल मिटा डाला कि हमारी असर न हो सके
Written By:-
Chandan Kumar Gupta

गम-ए-तन्हाई

शहर की भीड़ में तन्हाई बिजली सी कड़कती है
और कहती है तन्हाई इस भीड़ को देखकर
'इतने सारे लोगों में तेरा अपना यहाँ पे कोई नहीं
ढल जाएगी ये शाम युहीं इक हमदर्द की तलाश में
कट जाएगी ये जिन्दगी युहीं आबडू की भड़ास में
तू भी इस भीड़ का इक हिस्सा बनकर रह जायेगा
अंतिम यात्रा पे तू भी खाली हाथ ही जायेगा
फिर क्यूँ तू किसी से कुछ उम्मीद करता है
जीता यहाँ वो भी है जो यतीम होता है'
जानते हैं सबकुछ मानते हैं सबकुछ फिर भी मगर
जाने क्यों युहीं मन किसी के ख्यालों में रमती रहती है
शहर की भीड़ में तन्हाई बिजली सी कड़कती है...
                       Written By:-
                    Chandan Kumar Gupta